ब्यूरो संवाददाता इटावा : मुख्यमंत्री ने सितंबर में प्रदेशभर के किसानों और जनता को आश्वस्त किया था कि 7 महीने के अंदर सड़कों पर अन्ना घूमने वाले गोवंश की समस्या को समाप्त कर लिया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों को भी तेजी से काम करने के निर्देश दिए गए थे। नई व्यवस्था के तहत सभी ब्लॉक क्षेत्र में बड़े गौ आश्रय व संरक्षण केंद्र बनाए जाने थे। जिनकी क्षमता 2 हजार से 3 हजार अन्ना मवेशियों की क्षमता होनी थीं और इसके लिए तकरीबन 40 से 45 एकड़ जमीन की आवश्यकता थी। ऐसे में जिले के सभी आठ ब्लॉक में जमीन की तलाश अब तक पूरी नहीं हों सकी है फिलहाल शुरुआत काफी धीमी है। चकरनगर के सिंड़ौस में ग्राम पंचायत की जमीन को गौ संरक्षण के लिए देने की पहल की गयी थी। मामले में एसडीएम को जमीन की जांच के लिए पत्र लिखा गया था। जांच के बाद जमीन को उपयुक्त न होने पर मामला लटक गया। अन्य ब्लॉक क्षेत्र में विभागों की खाली पड़ी जमीन को उसके लिए प्रयोग करने की तैयारी की जा रही है। हालांकि यह प्रक्रिया काफी लंबी है, क्योंकि पिछले दिनों काऊ सफारी के लिए जब चकरनगर व बढ़पुरा क्षेत्र में जमीन की तलाश की गई तो जरूरत के अनुसार...
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