लेखक : डॉ धर्मेन्द्र कुमार (असिस्टेंट प्रोफेसर) दरअसल मेरे जहन में यह प्रश्न कई बार कौधने लगता है कि क्या समाजवादी विचारधारा में अंतर और परिवर्तन हो गया है? क्योंकि आज जिस तरह समाजवादी कार्यकर्ता या पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारी धर्म का प्रचार करने में लगे हुए हैं ,यह रीत और नीति तो भारतीय जनता पार्टी की है। समाजवादी लोग तो सदैव इस धर्म के धंधे से दूर ही रहे,और लगता है कि अब यदि कहा जाय कि सामाजवादी कार्यकर्ता, पदाधिकारी भारतीय जनता पार्टी के एजेंडे को लागू करने में लग गए हैं तो इस बात में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। अब के समाजवादी भी भारतीय जनता पार्टी के एजेंडे को लागू करने में जुट गए हैं समाजवादी विचारधारा का फासीवादी तथा यथा स्थित वादी विचारधाराओं से सदैव संघर्ष रहा है चाहे वह देश की बात हो या विदेश की । समाजवादियों ने नस्लभेद ,रंगभेद, जाति भेद के नाम पर सदैव संघर्ष जारी रखा । क्योंकि हिंदू धर्म के तहत हमें 6743 जातियों में बांट कर हमारे बीच जातीय विभेद पैदा किया गया और 6743 जातियां शूद्र वर्ण में रख दी गई। और इन्हें जीवन उपयोगी हर अधिकार से वंचित रखा गया ।यह दर्द समाजवादी नेताओं के ...
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