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राम मनोहर लोहिया जयंती विशेष: समाजवादी विचारक, क्रांतिकारी नेता, समता बंधुता के समर्थक 'डॉ लोहिया' को विनम्र श्रद्धांजलि

लेखक: डॉ धर्मेंद्र कुमार- असिस्टेंट प्रोफेसर
डॉ राम मनोहर लोहिया का जन्म उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले  के अकबरपुर गांव में 23 मार्च 1910 को हुआ l पिता हीरालाल तथा माता चंदा देवी मूलतः राजस्थानी थे, जो व्यावसायिक कारणों से मिर्जापुर से आकर अकबरपुर में बस गए और लोहे का व्यवसाय करने के कारण उन्हें लोहिया  पुकारा गया l ढाई वर्ष की अल्पायु में डॉक्टर लोहिया की मां का निधन हो गया l 1920 में डॉक्टर लोहिया पिता के साथ अकबरपुर से मुंबई आ गए यही उनकी प्राथमिक शिक्षा एक मारवाड़ी स्कूल में, जहां से उन्होंने 1925 में मैट्रिक तथा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की l  1929 में कोलकाता विद्यासागर महाविद्यालय से स्नातक करने के पश्चात बर्लिन (जर्मनी ) के hombart विश्वविद्यालय में प्रख्यात अर्थशास्त्री sombart  के निर्देशन में 1932 में "नमक का अर्थशास्त्र " शीर्षक पर शोध प्रबंध   लिखकर डॉक्टरेट (पी-एचडी) की उपाधि प्राप्त की l उच्च शिक्षा प्राप्ति के लिए उन्हें अग्रवाल  कोस  से आर्थिक मदद मिली l पिता हीरालाल गांधीवादी विचारधारा के पोषक थे डॉक्टर लोहिया बचपन से ही राजनीतिक गतिविधियों में रुचिसीन थे l 1924 में 14 वर्ष की आयु में कांग्रेस के अधिवेशन में प्रतिभाग किया 1928 में लोहिया ने कोलकाता में रहते हुए साइमन कमीशन का विरोध किया  l शिक्षा प्राप्त कर 1933 में जर्मनी से लौटे और राजनीति में सक्रिय हो गये 1934 में आचार्य नरेंद्र देव के नेतृत्व में "कांग्रेसी  सोशलिस्ट पार्टी" की स्थापना हुई l डॉक्टर लोहिया जयप्रकाश नारायण के साथ पार्टी में शामिल हुए तथा पार्टी का मुखपत्र "कांग्रेस सोशलिस्ट " का संपादन करने लगे l1935 में लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस पार्टी के अंतर्गत विदेश विभाग की स्थापना की गई जिसका सचिव राम मनोहर लोहिया को बनाया गया l  मतभेद के कारण 1938 में उन्होंने सचिव पद से त्यागपत्र दे दिया l  
1939 में प्रारंभ हुए द्वितीय विश्व युद्ध विरोधी आंदोलन का संचालन करने लगे l 1940 में लोहिया को गिरफ्तार कर 2 वर्ष का कठोर कारावास मिला l 1942 में गांधी जी द्वारा प्रारंभ किए गए 'करो या मरो' तथा 'भारत छोड़ो आंदोलन ' के समय भूमिगत रहकर "कांग्रेस रेडियो नामक  गुप्त रेडियो "की स्थापना की और 'उषा मेहता' के सहयोग से ब्रिटिश सरकार विरोधी और उत्तेजक प्रचार-प्रसार करने लगे l  सरकार के कड़े तेवरों के चलते डॉक्टर लोहिया जयप्रकाश नारायण के साथ नेपाल भाग गए जहां जयप्रकाश नारायण तथा अन्य नेताओं के साथ गिरफ्तार हुए किंतु डॉक्टर लोहिया जेल से फरार हो गए 1944 में लोहिया मुंबई से गिरफ्तार हुए और उन्हेंअसहनीय अमानसिक यातनाएं व तनाव का सामना करना पड़ा l  उनके अदम्य साहस से  थककर ब्रिटिश सरकार ने अप्रैल 1946 में उन्हें रिहा कर दिया l  1946 में लोहिया ने  पुर्तगाली सरकार से गोवा मुक्ति आंदोलन प्रारंभ किया गोवा सरकार ने उन्हें जेल भेज दिया l 9 अक्टूबर 1946 को गांधी के हस्तक्षेप से उन्हें रिहा किया गया l संविधान सभा का गठन ,देश विभाजन तथा कांग्रेस द्वारा अपनाई गई अन्य जातियों व उनके समाजवादी स्वरूप से आहत होकर डॉक्टर लोहिया ने  कांग्रेस छोड़ दी और उन्होंने 'सोशलिस्ट पार्टी' को पुनः सक्रिय किया उनका मानना था कि शुद्ध समाजवादी सिद्धांतों पर आधारित एक सशक्त संगठन की स्थापना की जाए ताकि निर्धनों पद दलितों तथा पिछड़े वर्गों के हितों और अधिकारों की सफलतापूर्वक सुरक्षा की जा सके इस उद्देश्य से उन्होंने संसद से बाहर रहकर अपने दल के नेतृत्व में 'अंग्रेजी हटाओ'  'दाम बांधो'  'जाति तोड़ो'  'हिमालय बचाओ' तथा 60 के दशक में 'अंग्रेजी हटाओ' तथा हिंदी को बढ़ावा देने के लिए आंदोलन चलाए l1952 से 1962 तक डॉक्टर लोहिया कई बार पंडित नेहरू के विरुद्ध चुनाव लड़े किंतु सफलता नहीं मिली l1963 में अमरोहा निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार सांसद बने l 1964 में लोहिया ने महंगाई ,भ्रष्टाचार , भाई भतीजावाद, लालफीताशाही, जैसे मुद्दों पर आंदोलन कर जनसामान्य का ध्यान आकृष्ट किया 1967 के उपचुनाव में उन्होंने गैर कांग्रेसी विरोधी दलों से गठबंधन कायम कर 'कांग्रेस हटाओ देश बचाओ' का नारा बुलंद किया फलस्वरूप आधे राज्यों में गैर कांग्रेसी सरकार की स्थापना हो सकी l गर्दन के रोग से पीड़ित डॉक्टर लोहिया को 30 सितंबर 1967 को दिल्ली के बिलिंगडन अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां 12 अक्टूबर 1967 को उपचार के दौरान उनका निधन हो गया l सरकार ने अस्पताल का नाम बदलकर राम मनोहर लोहिया नाम रख दिया l डॉक्टर लोहिया के राजनीतिक विचारों में इतिहास की वर्ग संघर्ष की चक्रीय मान्यता  "विश्व के इतिहास को प्राचीन मध्य और आधुनिक युग में विभाजित करना उसमें एक   अबाध   या एक के बाद एक उत्थान  क्रम  का  प्रतिपादन करना एक सांस्कृतिक बर्बरता है , जो किसी भी दृष्टि से दिलचस्प और तर्कसंगत नहीं है"  उसके प्रत्युत्तर में लोहिया का कथन है कि "यदि यह सत्य है जो जन्मा है ,वह मरेगा, तो यह भी सत्य है जो मरता है वह फिर  जन्म लेगा  l " यह सिद्धांत मनुष्य पर नहीं सभ्यताओं पर लागू होता है lडॉक्टर लोहिया का विचार था अब तक समस्त मानवीय इतिहास वर्गों और   वर्णों के  मध्य चलने वाले इस संघर्ष का और उससे उत्पन्न बदलाव अर्थात वर्गों की जकड़ से बने और  वर्णों के बिखराव से वर्ग बनने का इतिहास रहा है l
"चौखंभा राज्य " की योजना के माध्यम से केंद्रीय करण विकेंद्रीकरण की परस्पर विरोधी अवधारणाओं के मध्य समन्वय और संतुलन स्थापित करने का  सुझाव दिया  उनका उद्देश्य सिर्फ विकेंद्रित प्रशासन की योजना ना होकर आर्थिक शक्ति के विकेंद्रीकरण की योजना स्थापित करना था lयह योजना सिर्फ स्वायत्तशासी स्वाबलंबी गांव की योजना नहीं वरन एक विवेकशील एवं जीवंत गांव की योजना है उन्होंने कहा था कि" बड़े स्तर की राज्य व्यवस्था देश के कूड़े को   बुहारेगी   और छोटे स्तर की राजव्यवस्था गली मोहल्ले और गांव के कूड़े को साफ करेगी l"
एशियाई समाजवाद की अवधारणा पर 26 मार्च 1952 में रंगून में आयोजित एशियाई समाजवादी कान्फ्रेंस की प्रारंभिक सभा को संबोधित कर निरंकुशवाद व सामंतवाद का विरोध किया l  विकेंद्रीकरण शासन का प्रबल समर्थन किया l डॉक्टर लोहिया ने  वाणी स्वतंत्रता  और कर्म नियंत्रण को राजनीतिक चिंतन के लिए महत्वपूर्ण बताया l वाणी स्वतंत्रता के अंतर्गत उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता, भाषण की स्वतंत्रता, संगठन की स्वतंत्रता ,तथा निजी जीवन की स्वतंत्रता का समर्थन किया तो वही निरपेक्ष चरित्र के समर्थन पर जोर दिया l
 
डॉक्टर लोहिया ने गांधीवादी 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' या "सिविल नाफरमानी आंदोलन " का प्रतिपादन करते हुए कहा अन्याय के प्रतिकार का यह समर्थ साधन है जो असमर्थ व्यक्तियों को समर्थ बनाकर अन्याय ,शोषण और दमन के खिलाफ व्यक्ति को सफलता प्रदान करता हैl उन्होंने आंदोलन को नया मोड़ देते हुए कहा कि "मारेंगे नहीं मानेंगे नहीं"  सिविल नाफरमानी किसी को मारने का सिद्धांत नहीं वरन सत्य और न्याय के लिए मरने का सिद्धांत है l

डॉक्टर लोहिया की प्रेरणा से नव समाजवाद की परिकल्पना में 1966 में समाजवादी दल द्वारा सात क्रांतियां प्रस्तावित कर उसे सार्वभौमिक रूप दिया गया सात क्रांतियां इस प्रकार हैं -स्त्री पुरुष समानता की स्वीकृति, रंगभेद पर आधारित असमानताओं का अंत, जाति और वर्ण संबंधी असमानता ओं की समाप्ति, विदेशी शासन और दमन का अंत , विश्व सरकार की स्थापना , व्यक्तिगत संपत्ति पर आधारित आर्थिक असमानता युक्त व्यवस्था का अंत और योजनाबद्ध आर्थिक विकास द्वारा उत्पादन में वृद्धि ,वयक्तिक मौलिक अधिकारों का विरोध तथा हिंसक युद्ध विरोधी तथा सविनय अवज्ञा या सिविल नाफरमानी के सिद्धांत की सर्वत्र स्वीकृति l डॉक्टर लोहिया ने धर्म व राजनीति पर विचार  पर  'दीर्घकालीन राजनीत' को 'अल्पकालीन धर्म' कहा दोनों के रचनात्मक रूप पर जोर दिया l डॉ लोहिया बौद्धिक स्वतंत्रता के समान धर्मनिरपेक्ष चरित्र का समर्थन करते हुए प्रत्येक व्यक्ति को धार्मिक स्वतंत्रता पूजा-पाठ धार्मिक निष्ठा आदि की स्वतंत्रता का समर्थन करते रहे जिसके लिए मौलिक अधिकारों का पुरजोर समर्थन किया l डॉक्टर लोहिया ने विश्वव्यापी समाजवादी व्यवस्था का समर्थन करते हुए पूंजीवाद और साम्यवाद दोनों को नाकाफी माना l उनकी मान्यता थी "सारे मनुष्यों को पेट भर अन्न"  "उनकी आजादी की प्यास" और "युद्ध बंदी" की आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए दोनों विचारधाराओं की क्षमता और सामर्थ्य नहीं है ,अतः उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर  समता, संपन्नता और विश्व परिवार का समर्थन किया l 
डॉक्टर लोहिया का मानना था कि भारतीय समाज का पतन उस में विद्यमान कई विषमताओं के कारण हुआ जिसमें जाति व्यवस्था, नर -नारी अस्मिता, अस्पृश्यता, रंगभेद प्रमुख हैं l वह सामाजिक विषमताओं को समाप्त कर एक सामाजिक समानता आधारित समाज की व्यवस्था की स्थापना के पक्षधर थे l

आर्थिक असमानता के लिए वह जाति व्यवस्था को उत्तरदाई मानते थे उन्होंने कहा "आर्थिक असमानता और जात पात भेदभाव दो जुड़वा राक्षस है यदि एक से लड़ना है तो दूसरे से भी लड़ना आवश्यक है"  डॉक्टर लोहिया समान अवसर नहीं वरन पिछड़ी जातियों की प्राथमिकता पर आधारित सामाजिक व्यवस्था के पक्षधर थे जिसका लाभ उठाकर यह जातियां अपना सामाजिक उत्थान कर सकें तथा सम्मान पूर्वक जीवन जी सकें l डॉक्टर लोहिया का विचार था कि "क्रांतिवाद के बिना समाज का सही विकास संभव नहीं होगा l " आर्थिक असमानता आधारित वर्गों के विशेष अधिकारों की समाप्ति पर जोर दिया और "दाम बंदी" का समर्थन किया ताकि उत्पादन के माध्यम से उत्पादन के साधनों के मालिकों द्वारा शोषण न किया जा सके ,और उचित मूल्य पर जनता को जीवन निर्वहन हेतु साधन, सेवक और सामग्री उपलब्ध हो सकेl डॉ लोहिया ने कहा मैं मानता हूं कि "इस मूल्य या दाम बांधो नीति को हकीकत में बदलने के लिए हमें आर्थिक सामाजिक जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन करने होंगे और सरकारी लूट पूंजी पतियों के मुनाफे और बड़े किसानों के हितों पर जमकर प्रहार करने होंगे l" जिसके लिए उन्होंने बंदूकधारी सेना की तरह "अन्न एवं भू -सेना के" गठन का सुझाव दिया l ताकि समाजवादी परिवर्तन की प्रक्रिया को कायम किया जा सके 
लोहिया ने भाषा संबंधी विचार में "अंग्रेजी हटाओ" अभियान प्रारंभ किया उन्होंने कहा "मैं चाहता हूं कि अंग्रेजी का सार्वजनिक प्रयोग तुरंत बंद होना चाहिए विधान परिषदों, सरकारी कार्यालयों, न्यायालयों ,दैनिक समाचार पत्रों और नाम पट्टी  में अंग्रेजी का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए तथा अंग्रेजी पढ़ाई बंद होनी चाहिएl" मानवतावादी, समाजवादी, समतावादी, दलित पिछड़ों की वकालत करने वाले ,सर्वहारा वर्ग के अधिकारों का पुरजोर समर्थन करने वाले, गैर कांग्रेसी बाद के सशक्त हस्ताक्षर डॉक्टर लोहिया ने अपने सशक्त नारे जैसे  "संसोपा ने बांधी गांठ पिछड़े पाबे 100  में  60 "  " जिंदा कौमें किसी का 5 साल तक इंतजार नहीं करती" तथा "एक पैर रेल में एक पैर जेल में" जैसे  नारे लगाकर क्रांतिकारी मुहिम छेड़ी समझौता बाद शब्द उनके शब्दकोश में नहीं था l बुराई चाहे किसी भी रूप में हो वह उसके कट्टर विरोधी थे ,और वह उसकी बुराई करने में कभी पीछे नहीं हटे l  स्पष्ट बादिता उनके चरित्र का स्थाई  गुण  था l समाजवादी विचारक, क्रांतिकारी नेता, समता बंधुता के समर्थक , सर्वहारा वर्ग के अधिकारों के संरक्षक व उसके सशक्त हस्ताक्षर डॉक्टर राम मनोहर लोहिया को विनम्र श्रद्धांजलि l


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