ब्यूरो संवाददाता
इटावा: कोटा बैराज और गांधी सागर बांध से पानी छोड़े जाने से चंबल नदी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगी है। चकरनगर तहसील क्षेत्र के कांयछी, चकरपुरा व भरेह के भरेश्वर मंदिर के मुख्य मार्ग पर भर गया। कई गांव का तहसील मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। चंबल किनारे भरेह क्षेत्र के गांव गढ़ाकास्दा व सिकरोड़ी पुल व चकरनगर क्षेत्र के खिरीटी गांव के पास मुख्य सड़क मार्ग पर भर गया। इस संबंध में तहसीलदार श्रीराम यादव ने बताया कि चंबल का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। कांयछी व चकरपुरा समेत कुछ गांव के रास्ते डूब गए है। प्रशासन ने प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय हरौली बहादुरपुर, नीमा डाडा, चकरपुरा, कायछी आदि को बंद करने का आदेश दिया है।
जिलाधिकारी अवनीश राय, एसएसपी जयप्रकाश सिंह, अपर जिलाधिकारी जयप्रकाश समेत कई अधिकारियों ने भरेेह, बिठौली, सहसों, चकरनगर, पछायगांव आदि बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर दिए जरूरी दिशा निर्देश। जिलाधिकारी अवनीश राय ने बताया कि बाढ़ की स्तिथि पर लगातार नज़र रखी जा रही है। स्तिथि नियंत्रण में है, प्रभावित लोगों को ऊंचे स्थानों पर पहुचा दिया गया है। चकरनगर क्षेत्र में प्रवाहित चंबल, यमुना व क्वारी नदी की बाढ़ से निपटने के लिए 12 बाढ़ चौकियां बनाई गई है। यहां लेखपाल समेत विभिन्न कर्मचारी तैनात किए गए है। एसडीएम सदर राजेश कुमार वर्मा व एसडीएम चकरनगर मलखान सिंह ने बताया कि चंबल नदी के बढ़ते जल स्तर पर लगातार निगरानी की जा रही है ग्रामीणों को सजग रहने को कहा गया है।
चम्बल नदी में जिस तरह से पानी बढ़ रहा है उससे आसपास के गांवों में बाढ़ आने का खतरा तो उत्पन्न हो ही गया है इसके साथ ही हजारों की संख्या में घड़ियालों के बच्चे बह गए हैं। यह ऐसा नुकसान है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती। यहां चम्बल नदी में जून के महीने में घडियालों के बच्चे जन्म लेते हैं और प्रकृति का प्रकोप देखिए कि अगस्त में वे पानी में बह गए। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि घड्यिालों के 95 प्रतिशत बच्चे इस पानी मे बह गए है ऐसी आशंका है कि अब ये काल के गाल में समा गए।
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