संवाददाता आशीष कुमार
इटावा : हर वर्ष 7 नवंबर को शिशु सुरक्षा दिवस मनाया जाता है इस दिन शिशु की सुरक्षा को लेकर जनपद के जिला अस्पताल सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ केंद्र पर जागरुकता कार्यक्रम के माध्यम से नवजात शिशु की उचित पालन पोषण और देखभाल के संदर्भ में जानकारी दी जाएगी | यह कहना है अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ बी एल संजय का। उन्होंने बताया कि नवजात शिशु की उचित देखभाल करना बहुत आवश्यक होता है क्योंकि शिशु के प्रति किसी तरह की असावधानी शिशु के जीवन पर भारी पड़ सकती है इसलिए शिशु सुरक्षा के संदर्भ में मां को जागरुक होना आवश्यक है। डॉ संजय ने बताया कि जिला अस्पताल सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जिन महिलाओं का प्रसव हो चुका है उन्हें विशेष जागरूकता कार्यक्रम में शिशु सुरक्षा के संदर्भ में विशेषज्ञों की टीम के द्वारा जानकारी दी जाएगी।
नवजात शिशु सुरक्षा के संदर्भ में विशेषज्ञ की राय
जिला अस्पताल के नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ रतनलाल ने बताया कि शिशु सुरक्षा दिवस को मनाने का प्रमुख उद्देश्य है मां को शिशु की देखभाल के लिए सही से जानकारी प्रदान करते हुए मार्गदर्शन करना | उन्होंने बताया कि नवजात शिशु के लिए प्रथम स्तनपान द्वारा जो मां का दूध बच्चा ग्रहण करता है वह उसके लिए प्रथम टीका के समान होता है, जो उसे संक्रमण से बचाता है। उन्होंने बताया कि मां के दूध में प्राकृतिक एंटीबॉडीज होते हैं जो संक्रमण के जोखिम को कम करता है और मां का दूध सुपाच्य भी होता है। मां का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार है इसलिए शिशु को छ: माह तक केवल स्तनपान अवश्य कराएं। शिशु की सुरक्षा के नवजात शिशु के तापमान पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। इसलिए मौसम के अनुसार बच्चे को सही से कपड़े पहनाएं और जन्म की तुरंत बाद बच्चे को स्नान बिल्कुल न करवाएं। डॉ रतन लाल ने बताया कि शिशु सुरक्षा के महत्व को ध्यान में रखते हुए हम अपने जिला अस्पताल में प्रसव उपरांत नवजात शिशु की मां को शिशु की सुरक्षा हेतु कंगारु मदर केयर दिलवाते हैं जिससे बच्चे को शारीरिक व मानसिक लाभ होता है और बच्चा सही से स्तनपान भी करता है। उन्होंने बताया कि कंगारु मदर केयर कक्ष में सभी महिलाओं को स्तनपान और कंगारु मदर केयर के बारे विशेष रुप से काउंसलिंग भी की जाती है। उन्होंने बताया कि जननी सुरक्षा योजना के तहत रुग्ण नवजात शिशु को निःशुल्क इलाज दिया जाता है। नवजात शिशु सुरक्षा की दृष्टि से विशेष गंभीर परिस्थितियों में नवजात शिशु को एसएनसीयू में भर्ती करा कर बाल रोग विशेषज्ञों की देखरेख में रख निःशुल्क इलाज भी उपलब्ध कराया जाता है।
शिशु सुरक्षा के लिए जरुरी है टीकाकरण
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ श्रीनिवास ने बताया कि शिशु की सुरक्षा के लिए जन्म से कुछ वर्ष तक टीकाकरण होना जरुरी होता है।जो शिशु को कई बीमारियों से बचाता है। उन्होंने बताया कि जनपद के सभी स्वास्थ्य केंद्र व आंगनबाडी केंद्रों पर निर्धारित दिवस पर टीकाकरण करवाया जाता है। शिशु के जन्म के साथ बीसीजी, हेपेटाइटिस बी, पोलियो की खुराक दी जाती है। जो नवजात शिशु की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है और उसे कई बीमारियों से बचाती है। उन्होंने कहा कि शिशु सुरक्षा के लिए टीकाकरण अत्यंत आवश्यक है।
इसलिए समय अनुसार सभी बच्चों का टीकाकरण अवश्य कराएं और बताया कि अप्रैल 2022 से अक्टूबर तक (जन्म से 24 घंटे के अंदर) बर्थ डोज -हेपेटाइटिस बी , बीसीजी, पोलियो खुराक 14588 बच्चों को दी जा चुकी है और 1 वर्ष से ऊपर के बच्चों को बीसीजी -23026,ओपीवी/पेन्टा/रोटा-21980,आईपीवी-21980, मिजिल्स -21201 बच्चों को टीका लगाकर प्रतिरक्षित किया जा चुका है।
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