ब्यूरो संवाददाता
इटावा: इन दिनों फसलों की बुवाई चल रही है और किसान खाद के लिए परेशान हैं। समितियों पर खाद नहीं है या फिर कम मात्रा में खाद आती है जो किसानों की मांग को लेकर कम है इससे किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिल पा रही है तो वे बुवाई कैसे करें।
कई समितियों पर तो खाद उपलब्ध ही नहीं है। यह माना जा रहा है कि सरसों और आलू और गेहूं की बुवाई एक साथ होने के कारण खाद की डिमांड बढ़ गई है और उसकी पूर्ति नहीं हो पाने के कारण संकट है। इन दिनों स्थिति यह है कि सरसों आलू व गेंहूं की एक साथ बुवाई आ जाने के कारण किसानों को खाद की मारामारी है। डीएपी खाद किसान आलू सरसों व गेहूं की बुवाई के समय डालता है।
आलू की बुवाई में सबसे अधिक डीएपी खाद किसान दो बीघा प्रति बोरी से लेकर तीन बीघा तक डालता है जिसके कारण सबसे अधिक डीएपी की आवश्यकता आलू की बुवाई में किसानों को पड़ती है। इस समय डीएपी खाद के लिए मारामारी चल रही है। किसानों का कहना है कि समय तीनों फसलों की बुवाई एक साथ ही आ जाने के कारण खाद की किल्लत की समस्या हो रही है।
पहले अक्टूबर माह तक सरसों की बुवाई हो जाती थी और अक्टूबर से लेकर 15 नवंबर तक अधिकांश आलू की बुवाई भी हो जाती थी। इक्का-दुक्का आलू नवंबर के दूसरे सप्ताह के बाद की बुवाई रह जाती थी। नवंबर के महीने से गेहूं की बुवाई शुरू होती है। इस तरह डीएपी खाद का क्रम मिलने का बना रहता था। अब तीनो फसलोें की बुवाई एक साथ हो रही है। आलू, सरसोें तथा गेहूं तीनो की बुवाई इस समय एक साथ चल रही है जिसके कारण किसानों को खाद की समस्या हो रही है और विभाग को खाद उपलब्ध कराने में दिक्कत हो रही।
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