ब्यूरो संवाददाता
इटावा: आधुनिक परिप्रेक्ष्य में श्री मद्भगवद्गीता ज्ञान की सार्थकता कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसका मुख्य उद्देश्य न केवल जनपद में बल्कि सम्पूर्ण भारत के तरुण मन में मानवीय मूल्यों का संचार करना है। इन मानवीय मूल्यों का संकलित ग्रंथ गीता है। जिसमें अच्छे कार्य का अनुशरण करने की शिक्षा दी गयी है। जीवन में आने वाली सभी समस्याओं का हल इस ग्रंथ में है यथा काम, क्रोध, मोह, लोभ तथा अन्य प्रत्येक प्रकार की चिंताओं का भी हल दिया गया है।
इस कार्यशाला में पाँच मुख्य बातें बताई गयी हैं जो प्रत्येक के जीवन में आवश्यक हैं क्रोध पर नियंत्रण, आत्ममंथन, कर्म के अनुसार फल यानी परिणाम की चिंता न कर कर्म पर पर ध्यान, लक्ष्य की तरफ एकाग्रता आदि प्रमुख हैं। इस ग्रंथ में बताया गया है कि आनन्द मनुष्य के अन्दर ही निवास करता है बस आवश्यकता है उसके अनुभव करने की। गीता हमें तनाव रहित जीवन जीने की कला सिखाती है जीवन मुत्यु के चक्र का स्पष्टीकरण देती है। ईश्वर के प्रति अपने तरीके से निष्ठा रखने का मन्त्र देती है। ऐसी भावना से इस कार्यशाला में सभी छात्र-छात्राओं , अध्यापक तथा अन्य मनीषियों के मन को स्पर्श करने का कार्य किया गया । कार्यशाला का उद्घाटन श्रीमती नीलम राय वर्मा धर्मपत्नी एसएसपी इटावा श्री संजय कुमार वर्मा द्वारा किया गया और उन्होंने विद्यार्थियों को गीता ज्ञान की सार्थकता के बारे में चर्चा की। उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर की कविता सुनाकर सभी का मन मोह लिया।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रो. राजेश त्रिपाठी प्राचार्य जनता कॉलेज बकेवर ने प्रस्तुत की जिसमें उन्होंने बताया कि संयुक्त प्रयास से गीता ज्ञान का प्रसार प्रत्येक विद्यालय में विद्यार्थियों के बीच किया जायेगा। इसके लिये जनपद के लगभग 300 विद्यालयों में कक्षा 6 से 8, कक्षा 9 से 12 तथा डिग्री कॉलेज के छात्र-छात्रायें सम्मिलित होंगे। प्रत्येक विद्यालय में संयोजक नियुक्त कर गीता से संबंधित विभिन्न क्रियाकलाप जैसे गीता ज्ञान, प्रश्नोत्तरी, गीता श्लोक पाठ तथा गीता नाट्य का आयोजन विद्यार्थियों द्वारा किया जायेगा। तत्पश्चात जनपद स्तर पर बृहद कार्यक्रम नारायन कॉलेज ऑफ साइंस एण्ड आर्ट्स में प्रस्तावित रहेगा। सभी जनपद के बच्चों का पुरस्कार वितरण भी आगे समय में प्रस्तावित है। मुख्य वक्ता डॉ विद्याकांत तिवारी ने कर्मयोग पर विस्तार से चर्चा की उन्होंने कौरव और अर्जुन का उदाहरण प्रस्तुत कर ईश्वर के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। डॉ महेश तिवारी ने गीता में आठवें अध्याय तक विस्तार से चर्चा की। श्री भगवान दास त्रिपाठी ने गीता के सार विस्तार से वर्णन किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री अमरनाथ जी प्रचारक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ वर्तमान दायित्व प्रान्त मुख्य मार्ग प्रमुख ने गीता पर विस्तार से चर्चा कर गीता पर कर्म प्रधान, एकाग्रता, आत्मचिंतन, आत्म मूल्यांकन, दिनचर्या में अनुशासन, संगठन कुशलता, गीता एवं योग पर विस्तार से चर्चा कर सभी को मंत्रमुग्ध कर लिया। कार्यक्रम की जिला संयोजक डॉ श्रेता तिवारी ने कार्यक्रम की सफलता के लिये सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि हमें अर्जुन बन कर गीता का पाठ करना चाहिये जिसमें सभी समस्याओं का हल विराजमान है। कार्यक्रम का सफल संचालन श्री राजेश सिंह ने किया। इस कार्यशाला के आयोजन में पंकज कुमार सिंह चौहान, डॉ धर्मेंद्र शर्मा, योगेश दुबे, अरुण दुबे, कर्ण सिंह , उदयवीर सिंह, कंचन तिवारी, शैलेन्द्र अनठुलिया, स्नेह मिश्रा, नेत्रपाल , सुधीर मिश्रा, आशुतोष तिवारी दयानिधि चौबे आदि की गरिमामई उपस्थिति रही।



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