ब्यूरो संवाददाता
इटावा : बारिश से किसानों के मुरझाए चेहरे पर रौनक लौट आई है। पिछले दस दिनों तक उमस और गर्मी के साथ-साथ धूप से जनजीवन बेहाल हो गया था। बारिश के अभाव में किसानों की फसल और नर्सरी सूखने के कगार पर पहुंच गई थी। मंगलवार की सुबह तीन बजे बरसात होने से जहां मौशम खुशगवार हो गया। जिन किसानों ने धान नर्सरी नहीं डाली थी वह धान नर्सरी की पौध डालने में लग गए हैं।
मंगलवार की सुबह तीन बजे से बरसात होते ही कृषि के कार्य में भी तेजी आई है। साथ ही अन्य फसलों में भी हरियाली छा गई है। यदि मानसून धोखा दे जाए तो किसानों के लिए चिंता का विषय बन जाता है। बरसात न होने से अत्यधिक खर्च बढ़ जाता है। इस कारण खेती में फायदे की जगह घाटा हो जाता है।
मानसून की पहली बारिश कुछ किसानों के लिए संजीवनी तो कुछ के लिए नुकसान दायक साबित हुई है। जिन खेतों में मूंग, मूंगफली, उर्द की फसलें खड़ी थी या कटी पड़ी है उन्हें नुकसान हुआ है। क्षेत्र में कई खेतों में पानी भर जाने से मूंगफली किसानों को फसल बर्बाद होने की चिंता सता रही है। किसानों को खेतों में पानी भरने से चिन्ता में डाल दिया है।

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